(N/A) एल्कीन का हाइड्रोहैलोजनीकरण एक इलेक्ट्रॉनस्नेही योगात्मक अभिक्रिया है,जिसमें हाइड्रोजन हैलाइड ($HX$,जहाँ $X = Cl, Br, I$) एल्कीन के द्वि-आबंध पर जुड़कर एल्काइल हैलाइड बनाता है।
मार्कोवनिकोव का नियम,जिसे $1869$ में प्रतिपादित किया गया था,के अनुसार जब एक असममित अभिकर्मक एक असममित एल्कीन में जुड़ता है,तो अभिकर्मक का ऋणात्मक भाग द्वि-आबंध वाले उस कार्बन परमाणु से जुड़ता है जिसके पास हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या कम होती है।
उदाहरण: प्रोपीन $(CH_3-CH=CH_2)$ की $HBr$ के साथ अभिक्रिया:
$CH_3-CH=CH_2 + HBr \rightarrow CH_3-CH(Br)-CH_3$ ($2$-ब्रोमोप्रोपेन,मुख्य उत्पाद) और $CH_3-CH_2-CH_2Br$ ($1$-ब्रोमोप्रोपेन,गौण उत्पाद)।
मार्कोवनिकोव के नियम के अनुसार,$HBr$ से $Br^-$ आयन मध्यवर्ती कार्बन परमाणु (जिसके पास कम हाइड्रोजन हैं) पर आक्रमण करता है,जिससे $2$-ब्रोमोप्रोपेन मुख्य उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है।